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*ग्रामीण क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा पर‌ उत्साह* *गोवर्धन पूजा सोमवार 13/11/2023 दिन सोमवार को मनाया गया*

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ग्रामीण क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा पर‌ उत्साह

गोवर्धन पूजा सोमवार 13/11/2023 दिन सोमवार को मनाया गया


फरसगांव/विश्रामपुरी ~ कोंडागांव जिले के‌ विकासखंड बड़ेराजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत हरवेल और आसपास के गांवों में गोवर्धन पूजा धुमधाम के साथ मनाया गया जिसमें जानकारी के अनुसार अक्सर इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में धान कटाई के बाद किसान अपने खेतों के भारा बांधकर घर‌ लाके मिंजाई करने में जुटे रहते हैं और इस दिन का इंतजार एक महिने पहले से तैयारी किया जाता है
कुछ इसी तरह ग्राम पंचायत हरवेल से‌ लगे‌ ग्राम किबडा छिंदली कोपरा धामनपुरी बालेंगा डिहीपारा पिटीसपाल, पीढापाल, तीतरवंड,गम्हरी आदि क्षेत्रों में धुमधाम के साथ मनाया गया

जिले के ग्रामीण क्षेत्र में दीपावली कुछ अलग ही अंदाज में मनाई जाती है। लक्ष्मी पूजा के दिन ग्रामीण अधिक व्यस्त नहीं रहते किंतु गोवर्धन पूजा बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। यह त्योहार परंपरागत तरीके से मनाई जाती है। इस दिन गाय बैल को खिचड़ी खिलाने के अलावा धान एवं कृषि संबंधित औजारों की विशेष पूजा होती है

जिले के ग्रामीण क्षेत्र में दीपावली कुछ अलग ही अंदाज में मनाई जाती है। लक्ष्मी पूजा के दिन ग्रामीण अधिक व्यस्त नहीं रहते किंतु गोवर्धन पूजा बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। यह त्योहार परंपरागत तरीके से मनाई जाती है। इस दिन गाय बैल को खिचड़ी खिलाने के अलावा धान एवं कृषि संबंधित औजारों की विशेष पूजा होती है।
क्षेत्र में कई गांव ऐसे हैं जहां धनतेरस के दिन सार्वजनिक तौर पर गौरा-गौरी की स्थापना की जाती है। जहां प्रतिदिन गौरी-गौरा की पूजा होती है जिसमें प्रतिदिन देर रात तक बाजे गाजे के साथ बैगाओं का नृत्य चलता है। अमावस्या की रात्रि में कलश यात्रा निकलती है, दूसरे दिन सुबह कलश को गौरी-गौरा के साथ विसर्जन किया जाता है। कलश एवं गौरी-गौरा के विसर्जन के पश्चात ही गाय बैल को खिचड़ी खिलाया जाता है।

खिचड़ी की होती है पूजा

गाय-बैल को खिचड़ी खिलाने के लिए विशेष रूप से तैयारी की जाती है। गांव में गाय-बैल की पूजा के लिए सप्ताह भर पहले ही तैयारी शुरू होती है जिसमें गाय-बैल के गले एवं सींग आदि में बांधने के लिए सजावट की चीजें बाजारों से खरीद कर लाते हैं। गोवर्धन पूजा के दिन सुबह से ही खिचड़ी की तैयारी होती है, खिचड़ी में कुम्हड़ा, बरबटी, कोचई, अरबी, शकरकंद एवं अन्य प्रकार के कंदमूल विशेष रूप से डाले जाते हैं। गाय-बैल को खिचड़ी का भोग खिलाया जाता है तत्पश्चात वहीं से गाय बैल का जूठन ग्रहण करने के पश्चात ग्रामीण भोजन करते हैं।