June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  

LIVE FM

CG24 Express

Latest Online Breaking News

*रमजान आदेश विवाद पर सियासत गरम: वक्फ बोर्ड बनाम सरकार, सच क्या है?* 

विज्ञापन बॉक्स 

*रमजान आदेश विवाद पर सियासत गरम: वक्फ बोर्ड बनाम सरकार, सच क्या है?*

*रिपोर्टर इमरान पारेख*

छत्तीसगढ़ में रमजान माह को लेकर जारी कथित आदेश के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। प्रदेश की सियासत में इस मुद्दे पर बयानबाज़ी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष अमीन मेमन ने इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज के बयान पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार 19 तारीख को जारी एक पत्र में यह उल्लेख किया गया था कि रमजान माह के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पहले कार्यालय छोड़ने की अनुमति शासन द्वारा दी गई है। यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसमें राज्य सरकार की नीतियों का हवाला भी दिया गया था।

हालांकि, अगले ही दिन अल्पसंख्यक विभाग के सचिव अनुपम द्विवेदी ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि राज्य शासन द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। विभाग ने वायरल पत्र को भ्रामक और निराधार बताया।

“जनता जानना चाहती है सच” — अमीन मेमन

अमीन मेमन ने कहा कि जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि सच कौन बोल रहा है — वक्फ बोर्ड अध्यक्ष या शासन का अधिकृत विभाग। उन्होंने कहा कि यदि किसी जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति गलत या भ्रामक जानकारी प्रसारित करता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की कि यदि पत्र जारी करने में कोई त्रुटि हुई है तो संबंधित व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए और आवश्यकता हो तो माफी भी मांगनी चाहिए।

वक्फ बिल पर भी उठे सवाल

मेमन ने वक्फ बिल को लेकर दिए जा रहे बयानों पर भी स्पष्टीकरण की मांग की। उनका कहना है कि यदि नया वक्फ बिल मुसलमानों के हित में बताया जा रहा है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुराने और नए कानून में क्या अंतर है तथा समुदाय को इससे वास्तविक लाभ क्या मिलेगा।

जुमे की नमाज के विषय निर्धारण पर आपत्ति

मेमन ने आरोप लगाया कि जुमे की नमाज में होने वाली तकरीरों के विषय तय करने संबंधी निर्देश धार्मिक परंपराओं में अनावश्यक हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि तकरीरें स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों और समुदाय की जरूरतों के आधार पर होती हैं, किसी व्यक्ति विशेष द्वारा विषय निर्धारित करना उचित नहीं है।

भावनाएं आहत होने का आरोप

उन्होंने कहा कि रमजान और रोजेदार कर्मचारियों से जुड़े मामले में फैली भ्रामक जानकारी से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।

फिलहाल इस मुद्दे पर सियासत गरम है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और वक्फ बोर्ड की ओर से आगे क्या आधिकारिक रुख सामने आता