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*आईआईटी चौक के पास के गुमनाम गड्ढों से आ रही भ्रष्टाचार कि बू , आदिवासी विकास शाखा का काम बना सवाल* –

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*केशकाल, 26 मई 2026:*

केशकाल के व्यस्ततम ITI चौक पर चल रहे निर्माण कार्य में पारदर्शिता के सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया है। न कार्य का नाम पता, न लागत, न ठेकेदार का अता-पता और न ही जिम्मेदार इंजीनियर मौके पर मौजूद। पूछताछ में सामने आया कि यह आदिवासी विकास शाखा का कार्य है और इसके प्रभारी इंजीनियर राजीव सिंग हैं, लेकिन उनसे संपर्क करने पर उन्होंने भी कॉल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।

 

*मौके की स्थिति चिंताजनक:*

1. *सूचना पटल नदारद*: शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्यस्थल पर योजना का नाम, स्वीकृत राशि, कार्य एजेंसी और समय-सीमा दर्शाने वाला सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है।

 

2. *तकनीकी निगरानी शून्य*: पिलर के लिए खोदे गए गड्ढों की गहराई और चौड़ाई में भारी अंतर है। तकनीकी मापदंडों की अनदेखी से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

3. *जवाबदेही से बच रहे अधिकारी*: स्थानीय नागरिकों द्वारा जानकारी मांगने पर मजदूरों ने इसे “आदिवासी विकास शाखा का काम” बताकर पल्ला झाड़ लिया। कथित प्रभारी इंजीनियर राजीव सिंग से कई बार संपर्क का प्रयास किया गया, परंतु हर बार कॉल अनुत्तरित रही।

 

4. *सुरक्षा मानकों की अनदेखी*: खुले गड्ढों के आसपास न तो बैरिकेडिंग है, न ही चेतावनी संकेतक। व्यस्त चौक पर यह स्थिति कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

 

*नियम क्या कहते हैं*:

छत्तीसगढ़ लोक निर्माण नियमावली के अनुसार 2 लाख से अधिक के प्रत्येक कार्य में सूचना पटल लगाना, तकनीकी अधिकारी की देखरेख में कार्य कराना और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इसका उल्लंघन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच का विषय है।

 

*प्रशासन से मांग*:

नागरिकों ने कलेक्टर कोंडागांव से मांग की है कि इस ‘गुमनाम निर्माण’ की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। सूचना पटल लगवाकर कार्य की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और जवाबदेही से बच रहे इंजीनियर राजीव सिंग से स्पष्टीकरण लिया जाए।