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*स्कूली बच्चों से भरी ऑटो ने गाय बैल को मारी टक्कर बाल बाल बचे मासूम ऑटो में ठूंसे गए थे 18 बच्चे*।

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स्कूली बच्चों से भरी ऑटो ने गाय बैल को मारी टक्कर बाल बाल बचे मासूम ऑटो में ठूंसे गए थे 18 बच्चे।

एक्सीलेटर पैडल के नीचे बैग आने से हुआ हादसा

कोंडागांव — बच्चों से भरी ऑटो ने गाय बैल को टक्कर मारी जिसमें दर्जन भर बच्चे घायल हो गए घायलों का प्राथमिक उपचार चल रहा है ग्राम बांसकोट में आत्मानंद स्कूल संस्थान की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। जहां एक उड़ीसा के ऑटो क्रमांक ओडी 24 ई 5547 में 18 बच्चों को ठूंस ठूंस कर भरा गया था जो लगभग 15 किलोमीटर का सफर करके आत्मानंद स्कूल बांसकोट ले जा रहे थे। इसी बीच ग्राम बांसकोट में एक मोड़ पर सुबह लगभग 8 बजे ऑटो ने गाय बैल को टक्कर मारा जिसमें ऑटो में सवार बच्चों को मामूली चोटें आना बताया गया है। गंभीर हादसा होते-होते बचा है लगभग आधा दर्जन बच्चों को मामूली चोटे आई हैं जिनका प्राथमिक उपचार स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। घटना इतनी जबरदस्त थी कि एक भैंस का बच्चा घटनास्थल पर ही मर गया तथा कुछ गाय बैलों को भी छोटे पहुंची । राहत की बात यह कि बच्चों को अधिक चोट नहीं लगी।
प्रत्यक्षदर्शी कमलाबाई गंगवंशी एवं लखमूराम कलार ने बताया कि घटना के पश्चात बच्चे काफी भयभीत हो गए थे चीख पुकार कर रहे थे बच्चों का बैग एवं टिफिन बाटल इधर-उधर बिखर गया था।

मामले की खबर 6 घंटे बाद भी पुलिस एवं प्रशासन को नहीं है जबकि घटनास्थल से महज एक किलोमीटर दूर पर बांसकोट पुलिस चौकी स्थित है। चौकी प्रभारी बांसकोट विनोद नेताम ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना नहीं मिली है। स्कूल संस्थान के लापरवाही की हद उस समय उजागर हुई जब बच्चों को चोट लगने के बावजूद न तो पुलिस एवं प्रशासन को इसकी सूचना दी गई न ही पालकों को सूचना दी गई। स्थानीय लोगों ने इनको अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टर ने मामूली चोट बताकर प्राथमिक उपचार किया है जा रहा है। बता दें कि आत्मानंद स्कूल खुलने के बाद यहां अब तक बच्चों के आने जाने एवं सुरक्षा को लेकर संस्था में कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। यक्ष प्रश्न यह भी कि बच्चों को ढुलाने के लिए उड़ीसा से ऑटो बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी‌ यहां सुबह पाली में 7:30 बजे स्कूल लगती है जहां दूरदराज के बच्चों को 6 बजे ही घर से निकलना पड़ता है। ठंड के दिनों में यह बच्चों के लिए काफी तकलीफ देह स्थिति है। जिला प्रशासन एवं जिला शिक्षा अधिकारी को भी अव्यवस्था की सूचना दी गई थी किंतु इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बता दें कि यहां आनन फानन में स्कूल के प्राचार्य को हटा दिया गया है तथा एक अन्य शिक्षक को प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है। व्यवस्था में सुधार करने के बजाय प्राचार्य बदल दिया गया है।
एक्सीलेटर पैडल के नीचे बैग आने से हुआ हादसा

कोंडागांव — बच्चों से भरी ऑटो ने गाय बैल को टक्कर मारी जिसमें दर्जन भर बच्चे घायल हो गए घायलों का प्राथमिक उपचार चल रहा है ग्राम बांसकोट में आत्मानंद स्कूल संस्थान की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। जहां एक उड़ीसा के ऑटो क्रमांक ओडी 24 ई 5547 में 18 बच्चों को ठूंस ठूंस कर भरा गया था जो लगभग 15 किलोमीटर का सफर करके आत्मानंद स्कूल बांसकोट ले जा रहे थे। इसी बीच ग्राम बांसकोट में एक मोड़ पर सुबह लगभग 8 बजे ऑटो ने गाय बैल को टक्कर मारा जिसमें ऑटो में सवार बच्चों को मामूली चोटें आना बताया गया है। गंभीर हादसा होते-होते बचा है लगभग आधा दर्जन बच्चों को मामूली चोटे आई हैं जिनका प्राथमिक उपचार स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। घटना इतनी जबरदस्त थी कि एक भैंस का बच्चा घटनास्थल पर ही मर गया तथा कुछ गाय बैलों को भी छोटे पहुंची । राहत की बात यह कि बच्चों को अधिक चोट नहीं लगी।
प्रत्यक्षदर्शी कमलाबाई गंगवंशी एवं लखमूराम कलार ने बताया कि घटना के पश्चात बच्चे काफी भयभीत हो गए थे चीख पुकार कर रहे थे बच्चों का बैग एवं टिफिन बाटल इधर-उधर बिखर गया था।

मामले की खबर 6 घंटे बाद भी पुलिस एवं प्रशासन को नहीं है जबकि घटनास्थल से महज एक किलोमीटर दूर पर बांसकोट पुलिस चौकी स्थित है। चौकी प्रभारी बांसकोट विनोद नेताम ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना नहीं मिली है। स्कूल संस्थान के लापरवाही की हद उस समय उजागर हुई जब बच्चों को चोट लगने के बावजूद न तो पुलिस एवं प्रशासन को इसकी सूचना दी गई न ही पालकों को सूचना दी गई। स्थानीय लोगों ने इनको अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टर ने मामूली चोट बताकर प्राथमिक उपचार किया है जा रहा है। बता दें कि आत्मानंद स्कूल खुलने के बाद यहां अब तक बच्चों के आने जाने एवं सुरक्षा को लेकर संस्था में कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। यक्ष प्रश्न यह भी कि बच्चों को ढुलाने के लिए उड़ीसा से ऑटो बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी‌ यहां सुबह पाली में 7:30 बजे स्कूल लगती है जहां दूरदराज के बच्चों को 6 बजे ही घर से निकलना पड़ता है। ठंड के दिनों में यह बच्चों के लिए काफी तकलीफ देह स्थिति है। जिला प्रशासन एवं जिला शिक्षा अधिकारी को भी अव्यवस्था की सूचना दी गई थी किंतु इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बता दें कि यहां आनन फानन में स्कूल के प्राचार्य को हटा दिया गया है तथा एक अन्य शिक्षक को प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है। व्यवस्था में सुधार करने के बजाय प्राचार्य बदल दिया गया है।