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विभाग में फेंसिंग के नाम पर लाखों रुपए का घालमेल सामने आया है। विभाग के अधिकारियों ने फदहाखार में फेंसिंग कराने के लिए स्वीकृत लगभग पूरी राशि ही डकार ली है। सोचने वाली बात तो ये है की मैदानी अमले ने बिल बनाकर आगे बढ़ाया और अधिकारियों ने आंखमुदकर उसे पास भी कर दिया।

किसी विभाग के आला अधिकारी अपने AC चेंबर में बैठके विभाग चलाने लगे तो इसका क्या नतीजा होता है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण फदहाखार में जाकर देखा जा सकता है। वन विभाग के मैदानी अमले ने अपने विभाग के बड़े अधिकारियों को खुलेआम बेवकूफ बना दिया है। कई किलोमीटर में अमले ने फेंसिंग तो कर दिया लेकिन नेट को मजबूती देने के लिए लोहे का जो एंगल लगाना था उसे लगाया ही नहीं। बताया जा रहा है की जिन कर्मचारियों के भरोसे फदहाखार को सौंपा गया है वो लोग लाखों रुपए केवल फेंसिंग में ही डकार गए है। जब Democrecy.in की टीम ने मौके पर पहुंचकर काम देखा तो दंग रह गए। वन विभाग के कर्मचारियों ने फेंसिंग के लिए जो बेस लाइन बनाया है वह भी दोयम दर्जे का है। रेत गिट्टी और सीमेंट से जो बेसलाइन बनी है उसमे सीमेंट नही के बराबर है। यही कारण है की कई जगह से बेसलाइन भसक गया है। और तो और विभाग के अधिकारियों और आम लोगों के आंख में धूल झोंकने के लिए शुरू और आखरी में काम दिखाया है, लेकिन बीच का काम ही नहीं किया है। बीच में न तो बेसलाइन नजर आ रहा है और न ही फेंसिंग नजर आ रही है। विभाग ने अपने अधिकारियों को जितने एरिए में फेंसिंग होना बताया है उतने में कम से कम 5 हजार नग लोहे का एंगल लगाना था लेकिन मौके पर पांच सौ एंगल भी नजर नहीं आ रहा है। मतलब साफ है की कर्मचारियों ने 45 सौ एंगल का फर्जी बिल अधिकारियों के पास जमा किया है। बीच में फेंसिंग नेट नहीं लगाया उसका अलग से फर्जी बिल पास करा लिए है।
आपको बता दे शहर में रेलवे क्रासिंग के इस पर कोरमी रोड में फदहाखार है। इसका क्षेत्रफल 302 हेक्टेयर से अधिक है। इस जमीन पर अतिक्रमणकारियों की नजर है। लगभग आठ हेक्टेयर पर तो कब्जा ही हो गया है। बची जमीन पर भी अतिक्रमणकारियों की नजर लगी हुई है। यही कारण है की शेष जमीन को बचाने के लिए वन विभाग ने पूरे क्षेत्र को फेंसिंग कराने का निर्णय लिया और इसके लिए बड़ी राशि एलाट की गई। लेकिन वन विभाग के बड़े अधिकारियों के मनसूबे पर उनके ही विभाग का मैदानी अमला पानी फेर दिया है और लाखों रुपए बर्बाद कर दिए है। मैदानी अमले के भ्रष्टाचार ने अधिकारियों की पूरी योजना ध्वस्त कर दी है। यहां न तो वाणी प्राणियों को सुरक्षित रखा जा सकता है और न ही किसी योजना काम किया जा सकता है।

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