*विश्व रेबीज दिवस पर केशकाल में विशेष शिविर,* *39 पालतू पशुओं को लगा एंटी-रेबीज टीका पशुपालकों को रेबीज से बचाव के उपायों की दी गई महत्वपूर्ण जानकारी,* *छात्राओं को भी किया जागरूक*
विश्व रेबीज दिवस पर केशकाल में विशेष शिविर, 39 पालतू पशुओं को लगा एंटी-रेबीज टीका
पशुपालकों को रेबीज से बचाव के उपायों की दी गई महत्वपूर्ण जानकारी, छात्राओं को भी किया जागरूक
केशकाल। विश्व रेबीज दिवस 2026 के अवसर पर पशुधन विकास विभाग द्वारा पशु चिकित्सालय केशकाल में विशेष जागरूकता एवं टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया। उप संचालक पशुधन विकास विभाग डॉ. सुरेंद्र कुमार नाग के निर्देशन एवं वेटनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ. कस्तुरी प्रधान के नेतृत्व में आयोजित शिविर में पशुपालकों को रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।
शिविर के दौरान 32 कुत्तों एवं 7 बिल्लियों सहित कुल 39 पालतू पशुओं को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाया गया। वहीं 25 कुत्तों को कृमिनाशक दवा भी दी गई। पशुपालकों को सलाह दी गई कि वे अपने पालतू कुत्ते-बिल्लियों का समय पर टीकाकरण कराएं तथा उन्हें आवारा एवं संदिग्ध संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से बचाएं। पशुओं के व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की अपील भी की गई।
पशु सखियों को दिया गया तीन दिवसीय प्रशिक्षण
इसी क्रम में मंगल भवन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तीन दिवसीय पशु सखी आवासीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष बिहारीलाल शोरी एवं वरिष्ठ पत्रकार कृष्णदत्त उपाध्याय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
वहीं शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को विश्व रेबीज दिवस के उद्देश्य, रेबीज संक्रमण के कारण, इसके प्रमुख लक्षण तथा बचाव के प्रभावी उपायों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्राचार्य राकेश विश्वकर्मा एवं व्याख्याता साधना साहू भी उपस्थित रहे।
पशु के काटने या खरोंचने पर तत्काल करें ये उपाय
वेटनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ. कस्तुरी प्रधान ने बताया कि किसी संदिग्ध या अज्ञात पशु के काटने अथवा खरोंचने की स्थिति में घाव को तत्काल साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटीसेप्टिक का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि घाव को कसकर बांधना, जलाना अथवा उस पर मिर्च, तेल, मिट्टी या किसी अन्य घरेलू पदार्थ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। प्राथमिक सफाई के बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय जांच एवं एंटी-रेबीज वैक्सीन के संबंध में डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन सहित आगे का उपचार किया जाता है।
विभागीय टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान
शिविर के सफल आयोजन में डॉ. कस्तुरी प्रधान, डॉ. पुनऊ राम पोयाम, एवीएफओ गिरिजाशंकर, दिलीप, महेश, नरसिंह, रोशन, गजेंद्र एवं उर्वशी, ड्रेसर मोतीलाल, अटेंडेंट केशव, निर्मला, अमित एवं घनश्याम तथा पीएआईडब्ल्यू धनसिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आयोजित शिविर के माध्यम से पशुपालकों एवं विद्यार्थियों को रेबीज के प्रति जागरूक करते हुए समय पर टीकाकरण और तत्काल चिकित्सकीय उपचार के महत्व का संदेश दिया गया।
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