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ठेकेदार की लापरवाही से मासूम की मौत, एक सप्ताह बाद भी नगर पालिका की चुप्पी बरकरार

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ठेकेदार की लापरवाही से मासूम की मौत, एक सप्ताह बाद भी नगर पालिका की चुप्पी बरकरार

 

कोण्डागांव, 5 दिसंबर। नगर पालिका क्षेत्र के कोपाबेड़ा नहरपारा में सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान ठेकेदार की कथित लापरवाही एक परिवार पर भारी पड़ गई। 29 नवंबर को मनोज देव की चार वर्षीय इकलौती बेटी मिस्टी उर्फ इशिका की मौत उस खुले गड्ढे में डूबने से हो गई, जिसे नहर तालाब सौंदर्यीकरण के समय खोदा गया था और कार्य बंद होने के बाद महीनों तक खुला ही छोड़ दिया गया था।

 

परिजनों का आरोप : गड्ढा न भरने की लापरवाही बनी मौत का कारण

 

मृतक की मां अमीषा देव, चाचा मानिक देव, रानी सिंह, रेखा राय सहित पड़ोसियों ने बताया कि गर्मी के मौसम में नगर पालिका ने ठेकेदार अंकुश जैन के माध्यम से सौंदर्यीकरण का काम शुरू किया था। इसी दौरान लगभग छह फीट से अधिक गहरा गड्ढा बनाया गया था।

काम बंद होने के बाद न तो इस गड्ढे को भरा गया और न ही किसी प्रकार का सुरक्षा इंतज़ाम किया गया। बरसात में गड्ढा पानी से भर गया और यह मौत का कुआँ बन गया।

 

मफलर ने दिया मौत का सुराग

 

29 नवंबर की सुबह इशिका को आखिरी बार उसी गड्ढे के पास खेलते देखा गया था। कुछ देर बाद वह घर में नहीं मिली तो परिवार और पड़ोसियों ने खोजबीन शुरू की।

तलाश के दौरान गड्ढे में उसका मफलर तैरता हुआ दिखाई दिया। आशंका के चलते चाचा मानिक देव पानी में उतरे और बच्ची को बाहर निकालकर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश दोनों है। लोगों का कहना है कि, यदि गड्ढे को समय पर भरा या घेरा गया होता, तो मासूम की जान बच सकती थी।

 

एक सप्ताह बाद भी नगर पालिका की ओर से नोटिस नहीं

 

यह घटना हुए आज एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अब तक नगर पालिका परिषद की ओर से एक भी नोटिस जारी नहीं किया गया है।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी दिनेश डे का कहना है कि, मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है, ठेकेदार से मौखिक जानकारी ली गई है। ठेकेदार ने गड्ढा नहीं भरने की बात कही है। परिजनों का कहना है कि यह बयान नगर पालिका की उदासीनता को दर्शाता है।

 

3.50 करोड़ का प्रोजेक्ट, पेटी कॉन्ट्रैक्ट का खुलासा, अब जिम्मेदार कौन?

 

नगर पालिका परिषद ने नहरपारा तालाब सौंदर्यीकरण का कार्य लगभग 3.50 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत किया था, जिसमें रिटर्निंग वॉल सहित अन्य संरचनात्मक कार्य शामिल हैं।

ठेका उत्तम कुमार जैन को मिला था, लेकिन सीएमओ दिनेश डे के अनुसार, पूरा कार्य पूर्व भाजपा पार्षद अंकुश जैन के पास पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर है। साथ ही, इस प्रोजेक्ट में भाजपा के एक बड़े नेता की साझेदारी की बात भी सामने आ रही है। इसी वजह से, स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक सप्ताह गुजरने के बाद भी नगर पालिका द्वारा किसी भी स्तर पर कोई नोटिस या जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।

 

अब निगाहें प्रशासन पर, कौन होगा जवाबदेह?

 

एक मासूम की मौत के बाद जनता यह सवाल कर रही है कि, क्या कार्रवाई पेटी कॉन्ट्रैक्टर पर होगी या जिम्मेदार मुख्य ठेकेदार पर कार्रवाई होगी? या राजनीतिक दबाव की वजह से मामला दबा दिया जाएगा? फिलहाल कोण्डागांव सिटी कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अब प्रशासन के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं।