
दाह संस्कार के लिए लकड़ी नहीं, पार्षद ने वन विभाग पर जताई नाराज़गी
केशकाल/सुरडोगर। क्षेत्र के श्मशान घाट में दाह संस्कार के लिए लकड़ी उपलब्ध न होने से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे परिजनों को वन विभाग की ओर से “स्टॉक नहीं है” कहकर लौटा दिए जाने के बाद मामला गरमा गया।
सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद भूपेश चंद्राकर मौके पर पहुंचे और विभागीय कर्मचारियों से चर्चा की। पार्षद ने इसे वन विभाग की गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि
“दाह संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य में बाधा डालना बेहद अमानवीय और गैरजिम्मेदाराना है। विभाग में लकड़ी उपलब्ध होते हुए भी आमजन को सुविधा नहीं दी जा रही है।”
पार्षद ने आगे कहा कि यदि किसी परिवार को तत्काल दाह संस्कार करना पड़े और लकड़ी उपलब्ध न हो, तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए शर्मनाक है। उन्होंने मांग की कि
“वन विभाग समय रहते दाह संस्कार हेतु आवश्यक लकड़ी की व्यवस्था सुनिश्चित करे।”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह नगरीय क्षेत्र है, जहाँ रोज़ किसी न किसी प्रकार की घटनाएँ होती रहती हैं। ऐसे में श्मशान घाट में लकड़ी का अभाव विभागीय उदासीनता को उजागर करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग इस गंभीर मामले पर कब तक कार्रवाई कर व्यवस्था को सुचारू करता है।
दाह संस्कार के लिए लकड़ी नहीं, पार्षद ने वन विभाग पर जताई नाराज़गी
केशकाल/सुरडोगर। क्षेत्र के श्मशान घाट में दाह संस्कार के लिए लकड़ी उपलब्ध न होने से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे परिजनों को वन विभाग की ओर से “स्टॉक नहीं है” कहकर लौटा दिए जाने के बाद मामला गरमा गया।
सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद भूपेश चंद्राकर मौके पर पहुंचे और विभागीय कर्मचारियों से चर्चा की। पार्षद ने इसे वन विभाग की गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि
“दाह संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य में बाधा डालना बेहद अमानवीय और गैरजिम्मेदाराना है। विभाग में लकड़ी उपलब्ध होते हुए भी आमजन को सुविधा नहीं दी जा रही है।”
पार्षद ने आगे कहा कि यदि किसी परिवार को तत्काल दाह संस्कार करना पड़े और लकड़ी उपलब्ध न हो, तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए शर्मनाक है। उन्होंने मांग की कि
“वन विभाग समय रहते दाह संस्कार हेतु आवश्यक लकड़ी की व्यवस्था सुनिश्चित करे।”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह नगरीय क्षेत्र है, जहाँ रोज़ किसी न किसी प्रकार की घटनाएँ होती रहती हैं। ऐसे में श्मशान घाट में लकड़ी का अभाव विभागीय उदासीनता को उजागर करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग इस गंभीर मामले पर कब तक कार्रवाई कर व्यवस्था को सुचारू करता है।






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