
शासन के नियमों को ताक में रख छोड़ दी आधा दर्जन से अधिक अवैध परिवहन कर रही गाड़ियां
– कच्चे पेड़ो के गोलो की ट्रकों से हो रहा था परिवहन।
कोंडागाँव- वन विभाग का अमला ही वन मंत्री के इलाके से ही कच्चे पेड़ों को कटवा कर बेचने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं, महीने भर में ही एक नया मामला प्रकाश में आया है जहाँ एक ही कर्मचारी ने एक के बाद एक लगातार आधा दर्जन से ज्यादा ट्रक की जप्ती बनाई जो राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते अवैध तरीके से कच्ची पेडों के गोलों को काटकर राजधानी की ओर ले जाया जा रहा था। जानकारी के मुताबिक वन अमले के उन कर्मचारियों के द्वारा बुधवार की शाम से देर रात तक यह कार्रवाई की गई और गुरुवार की शाम होते ही गाड़ियों को छोड़ दिया गया। खैर यह जांच का विषय है कि, गाड़ियों को आखिर किन धाराओं के तहत जप्त किया गया था और किन नियम- कायदों के तहत इन गाड़ियों को छोड़ दिया गया। देखना होगा कि, इस मामले में क्या उच्च अधिकारी एक बार फिर संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला विभागीय बताकर ठण्डे बस्ते में चला जाता है।
—देर शाम चालान काटने के नाम पर 20-20 हजार नगद लेकर छोड़ दिया गया वाहनों को — वहीं एक के बाद एक लगातार जप्ती की कार्यवाही कर ख़डी करवाई गई आधे दर्जन से अधिक वाहनों को अवैध परिवहन के मामले में जाति की कार्यवाही तो की गई, वही बगैर शासन के गाइडलाइन के जांच बगैर ही बगैर एक वन विभाग के कर्मचारी के द्वारा प्रत्येक वाहनों से 20-20 हजार रुपए नगद चालानी कार्यवाही के नाम से लेकर छोड़ दिया, छोड़े गए वाहनों के मालिको से पूछने पर उन्होंने बताया कि कामेश्वर संडिल्य के द्वारा चालानी कार्रवाई के नाम पर नगद पैसा उनसे लिया गया है, वही किसी प्रकार की रसीद भीं नहीं देने की बात उन्होंने बताई, आप दिखने वाली बात है कि उक्त कर्मचारी के साथ और किन की संलिप्तता उजागर उजागर होती है
जानकारों की माने तो-
जानकारों के मुताबिक अवैध गोला तस्करी के मामले में वन अमला कार्यवाही तो कर सकता है, लेकिन जब मामला राजस्व भूमि से कटी हुई पेड़ो का हो तो कही न कही इस मामले में संबंधित इलाके के राजस्व अधिकारी से भी जानकारी लिया जाना चाहिए था। यही नहीं इसका भौतिक सत्यापन भी मौके पर किया जाना चाहिए, जिससे यह ज्ञात हो सके कि, यह लकड़ी जंगल से कटी है या फिर राजस्व भूमि से वही वन कर्मचारी के द्वारा ही अवैध परिवहन बताते हुए जब्ती की कार्यवाही कर तकरीबन 24 घण्टे डिपो में रखा गया था। कही ऐसा तो नही की, उक्त वन कर्मचारी के द्वारा अपनी रोटी एक बार फिर सेकने की कोशिश करते हुए विभाग व विभागीय अधिकारियों को बदनाम करने की कोशिश की गई हो खैर इस मामले की भी जांच होनी चाहिए
शासन के नियमों को ताक में रख छोड़ दी आधा दर्जन से अधिक अवैध परिवहन कर रही गाड़ियां
– कच्चे पेड़ो के गोलो की ट्रकों से हो रहा था परिवहन।
कोंडागाँव- वन विभाग का अमला ही वन मंत्री के इलाके से ही कच्चे पेड़ों को कटवा कर बेचने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं, महीने भर में ही एक नया मामला प्रकाश में आया है जहाँ एक ही कर्मचारी ने एक के बाद एक लगातार आधा दर्जन से ज्यादा ट्रक की जप्ती बनाई जो राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते अवैध तरीके से कच्ची पेडों के गोलों को काटकर राजधानी की ओर ले जाया जा रहा था। जानकारी के मुताबिक वन अमले के उन कर्मचारियों के द्वारा बुधवार की शाम से देर रात तक यह कार्रवाई की गई और गुरुवार की शाम होते ही गाड़ियों को छोड़ दिया गया। खैर यह जांच का विषय है कि, गाड़ियों को आखिर किन धाराओं के तहत जप्त किया गया था और किन नियम- कायदों के तहत इन गाड़ियों को छोड़ दिया गया। देखना होगा कि, इस मामले में क्या उच्च अधिकारी एक बार फिर संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला विभागीय बताकर ठण्डे बस्ते में चला जाता है।
—देर शाम चालान काटने के नाम पर 20-20 हजार नगद लेकर छोड़ दिया गया वाहनों को — वहीं एक के बाद एक लगातार जप्ती की कार्यवाही कर ख़डी करवाई गई आधे दर्जन से अधिक वाहनों को अवैध परिवहन के मामले में जाति की कार्यवाही तो की गई, वही बगैर शासन के गाइडलाइन के जांच बगैर ही बगैर एक वन विभाग के कर्मचारी के द्वारा प्रत्येक वाहनों से 20-20 हजार रुपए नगद चालानी कार्यवाही के नाम से लेकर छोड़ दिया, छोड़े गए वाहनों के मालिको से पूछने पर उन्होंने बताया कि कामेश्वर संडिल्य के द्वारा चालानी कार्रवाई के नाम पर नगद पैसा उनसे लिया गया है, वही किसी प्रकार की रसीद भीं नहीं देने की बात उन्होंने बताई, आप दिखने वाली बात है कि उक्त कर्मचारी के साथ और किन की संलिप्तता उजागर उजागर होती है
जानकारों की माने तो-
जानकारों के मुताबिक अवैध गोला तस्करी के मामले में वन अमला कार्यवाही तो कर सकता है, लेकिन जब मामला राजस्व भूमि से कटी हुई पेड़ो का हो तो कही न कही इस मामले में संबंधित इलाके के राजस्व अधिकारी से भी जानकारी लिया जाना चाहिए था। यही नहीं इसका भौतिक सत्यापन भी मौके पर किया जाना चाहिए, जिससे यह ज्ञात हो सके कि, यह लकड़ी जंगल से कटी है या फिर राजस्व भूमि से वही वन कर्मचारी के द्वारा ही अवैध परिवहन बताते हुए जब्ती की कार्यवाही कर तकरीबन 24 घण्टे डिपो में रखा गया था। कही ऐसा तो नही की, उक्त वन कर्मचारी के द्वारा अपनी रोटी एक बार फिर सेकने की कोशिश करते हुए विभाग व विभागीय अधिकारियों को बदनाम करने की कोशिश की गई हो खैर इस मामले की भी जांच होनी चाहिए






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