
मनोज कुमार डड़सेना को राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार 2024–25 से सम्मानित
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमन डेका ने किया सम्मानित
– पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, केशकाल के लिए गर्व का क्षण
केशकाल: शैक्षिक नवाचार, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले समर्पित शिक्षक श्री मनोज कुमार डड़सेना को वर्ष 2024–25 का राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ के राज्यपाल माननीय श्री रमन डेका द्वारा सम्मानपूर्वक प्रदान किया गया।
श्री मनोज कुमार डड़सेना, वर्तमान में पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, केशकाल, जिला कोंडागांव में कार्यरत हैं। वे विगत 27 वर्षों से न केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि शिक्षा के व्यापक स्वरूप – मानवता, नेतृत्व, अनुशासन और तकनीकी दक्षता – को भी छात्रों में विकसित कर रहे हैं।
शिक्षण में नवाचार और तकनीकी समावेशन
श्री डड़सेना ने पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों में आधुनिक तकनीकों जैसे कि स्मार्ट क्लास, पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन, शैक्षिक ऐप्स और रोबोटिक्स-आधारित गतिविधियों को जोड़ा है। उन्होंने स्कूल में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और रोबोटिक्स इंटर्नशिप जैसे कार्यक्रमों का सफल संचालन कर विद्यार्थियों को भविष्य की शिक्षा से जोड़ा।
🎯 बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम
उनके नेतृत्व में विद्यालय की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम विगत 4 वर्षों से लगातार 100% रहा है। न केवल उत्तीर्णता दर बल्कि विद्यार्थियों का समग्र प्रदर्शन, विषय समझ, और जीवन कौशल में भी निरंतर वृद्धि हुई है।
🎭 खेल, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा
श्री डड़सेना शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान नहीं मानते, बल्कि वे छात्रों को खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भाषण प्रतियोगिताओं, विज्ञान प्रदर्शनी और सामाजिक सेवा गतिविधियों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने विद्यालय में साप्ताहिक प्रेरणात्मक सत्र, जीवन मूल्यों पर आधारित चर्चाएँ, और शिविरों का आयोजन किया।
🤝 विद्यार्थियों व समाज के प्रति विशेष लगाव
वे हर छात्र को व्यक्तिगत रूप से समझते हैं और उसकी योग्यता अनुसार मार्गदर्शन देते हैं। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, करियर गाइडेंस, और नैतिक दिशा के लिए उनका योगदान उल्लेखनीय है। क्षेत्र के ग्रामीण एवं पिछड़े विद्यार्थियों के लिए वे शिक्षा के प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।
विद्यालय के शिक्षकगण, अभिभावक और छात्रगण इस सम्मान पर अत्यंत गर्वित हैं। यह सम्मान न केवल श्री डड़सेना की निजी उपलब्धि है, बल्कि संपूर्ण शिक्षा परिवार की प्रेरणा है।
“एक शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि एक पीढ़ी को गढ़ता है। मनोज सर जैसे शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं,” —







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